हिन्दुत्व जागरूकता

क्या सच मे मुसलमान कट्टर होते है या कायर?

एक बार ट्रेन में किसी ने मुसलमानों के बारे में एक बात कह दी,
ये बहुत कट्टर होते हैं
इनको किसी को जान से मारने काटने में कोई झिझक नहीं होती..
उसी ट्रेन में संघ के एक वयोवृद्ध प्रचारक जी भी बैठे थे..
वे बड़े मृदुभाषी और आराम से रुक रुक कर बोलने वाले व्यक्ति थे..
शुरू में वे चुप रहे
पर धीरे धीरे चर्चा में सम्मिलित हो गये,
मियों के कट्टर होने की बात पर वे मुस्कुराने लगे..
और जो बताया, उसे आज 30 साल बाद भी नहीं भूल सका,
उन्होंने कहा कि यह झूठ है
अर्धसत्य है कि मिएं कट्टर होते हैं..
सच यह है कि ये अंदर से बहुत बड़े कायर होते हैं,
ये समूह में जमा हो सकते हैं
सियारों की तरह हुआं हुआँ कर सकते हैं..
पर जैसे ही इनको लगता है
अब तो मार पड़ेगी या गोली चलेगी
ये भाग खड़े होते हैं..

दंगों में अक्सर देखा गया है,
हिन्दू का एक लड़का बीस मुसलमानों पर भारी पड़ता है, अगर मरने मारने पर उतर जाये..

इसका एक कारण इनका मांसाहार है,
कभी भी मांसाहारी जीव साहसी हो नहीं सकते..

बाघ हो, बिल्ली हो, तेंदुआ हो..
कोई भी मांसाहारी जीव हो
वह घात लगाकर, पीछे से छिपकर, चोरी से हमला करता है..
वह सामने से लड़कर जीत नहीं सकता, उसे पता होता है..
आमने सामने के युद्ध में जंगल में एक शाकाहारी भैंसा हो, एक गैंडा हो, वह भी बाघ पर भारी पड़ता है..
हाथी तो शुद्ध शाकाहारी है
वह बाघ से बिल्कुल नहीं डरता..
आमने सामने का युद्ध बाघ, हाथी से कभी नहीं करना चाहता,
वह भाग जाता है..
मिएं भी आमने सामने की चुनौती स्वीकार नहीं करते,
ये बहुत बड़े भगोड़े होते हैं..

यह मुस्लिम में परिवर्तित ही, इसीलिए हुये थे
क्योंकि वह डर गए थे..

दूसरा..
अन्य समुदाय के लोग या अन्य पंथ के लोग इन लोगों द्वारा जानवरों की हत्या करते हुए देखकर समझते हैं कि यह वीर होते हैं।
जबकि यह धारणा भी बिल्कुल गलत है।
क्योंकि आप अगर बड़े जीवों को इनके द्वारा मारते हुए भी देखेंगे
तो यह उसे भी, ये लोग सामूहिक रूप से वह पीछे से या छल से ही मार पाते हैं।
इतिहास उठा कर देख लीजिये पूरे विश्व में
इन्होंने एक भी युद्ध सामने लड़कर नहीं जीता है..
इन्होंने हर युद्ध कुछ दिनों के लिए छल से कपट से जीते,
फिर कुछ दिनों बाद सीधे युद्ध में भाग खड़े हुये..

इसलिए आप भी ये सोच दिल से निकाल दीजिये..
की ये कट्टर होते हैं..

इनकी बहादुरी तो आपको अफगानिस्तान में भी दिख गई होगी।
ये अपनी बहन, बेटी और बीवी को तालिबानियों के हाथ में देकर भागे है

युद्ध टालिये, संघर्ष से बचिये,

पर जब इनके बीच घिर गये, तो पूरी ताकत से एक लाठी, एक पत्थर लेकर भी, हिन्दू का एक लड़का अड़ गया तो बीसों भाग खड़े हुये हैं।

ऐसी अनेक घटनाएं बता देंगे।
और उन्हीं प्रचारक जी की बात याद रही।
दो बार घिर गया था।
अकेले भिड़ना पड़ गया।
और सचमुच वे खरहों की तरह भाग खड़े हुए।
इसलिए वीर बनिए।
प्रतिकार कीजिए।
साहसी होना, वीर होना खून में होता है।
और हिन्दू विश्व की सबसे वीर प्रजाति है।
यही सनातन सत्य है।
जो सदियों से लगातार युध्द कर रही है।
पर हार नहीं मानती।
भारत माता की जय
*वंदे मात
*
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