लव जिहाद स्कूलों में- हिन्दुत्व जागरूकता

लव जिहाद : स्कूलों में,,
स्कूलों में मुस्लिम लड़कियाँ अपनी हिन्दू सहेलियों की सेटिंग अपने मुस्लिम भाईयों से करवाती हैं और स्वयं हिन्दू लड़कों को भाई बनाकर रहती हैं, इसके इलावा स्कूल में जितने मुस्लिम अध्यापक होते हैं वे भी इस काम को अच्छे से अंजाम देते हैं वे कक्षा में सुंदर – सुंदर और प्यारी हिन्दू बच्चियों को छाँटते हैं और स्कूल के रजिस्टर वगैरा से उनके और उनके परिवार के बारे में पूरी जानकारी जुटाते हैं फिर कुछ मुस्लिम लड़कों को तैयार करते हैं और किसी न किसी बहाने उन लड़कों को उन भोली – भाली बच्चियों के इर्द गिर्द रखने में सहायता और प्रोत्साहन करते हैं।
इसके इलावा जो पुरुष मुसलमान अध्यापक होते हैं वे वहां काम करने वाली हिन्दू अध्यापिकाओं को फंसाने के लिए अलग से कोई न कोई षडयंत्र करते रहते हैं, कभी मीठी – मीठी बातों से, कभी उर्दू शायरी के द्वारा, तो कभी किसी न किसी काम के बहाने और बहुत तो शादीशुदा महिलाओं को भी फँसा लेते हैं।
अधिकतर आप पाएंगे कि ऐसी ही बुद्धिहीन और बेशर्म हिन्दू अध्यापिकाएँ इनसे चिपकने भी लगती हैं और रोज़ा, नमाज़ और अल्लाह जैसे विषयों में बड़े चाव से दिलचस्पी लेती हैं भले ही जिनसे उनका दूर – दूर तक कोई सम्बन्ध भी न हो। यदि स्कूल का मुख्याध्यापक ही मुसलमान हो तो फिर कहने ही क्या ?
वह तो विशेष रूप से हिन्दू महिलाओं और बच्चियों को छाँटने लगता है। ऐसे ही स्कूलों में लव जिहाद जैसी घटनाओं का होना बड़ी आम बात है। जिससे हिन्दू बच्चियाँ और महिलाएँ लव जिहाद का शिकार होकर खराब और बर्बाद हो रही हैं। हिन्दू लड़कियों को धर्मपरिवर्तन के बाद अपार कष्ट सहने पड़ते हैं, बच्चा पैदा करने की मशीन बनना पड़ता है तथा गाय – भैंस तथा बकरे के मांस बनाना पड़ता है और उसे ही खाना पड़ता है और कभी – कभी तो हत्या भी कर देते है।


