लव जिहाद मन्दिरों के बाहर:- हिन्दुत्व जागरूकता
लव जिहाद मन्दिरों के बाहर :-
लगभग हर मन्दिरों के बाहर कुछ दूर आपको छोटी बड़ी मज़ारें या कोई न कोई हरे रंग का पीरखाना मिल जाएगा जिसे देहात की भाषा में कहते हैं “सय्यद बैठा दिया” और इसपर बैठने वाला कोई न कोई तीखी दाढ़ी और मूँछ कटा मुल्ला बैठा होगा और साथ में मन्दिर के बाहर फूल, कलावा, प्रसाद, और अन्य वस्तुएँ बेचने के लिए भी मुसलमान दुकानें लगते हैं ।
और वहाँ मन्दिर के बाहर कुछ युवा भी खड़े होते हैं जो दिखने में पहनावे से हिन्दू लगते हैं, कुछ वहाँ कई मंदिरों में तो ऐसे गेरुआ वस्त्र धारण किये सन्यासी भी दिखाई देते हैं जो वास्तव में मुसलमान बहरूपिए होते हैं, कुछ बिखारी जो मन्दिर के बाहर प्रसाद मांगते हैं उनमें बहुत से बांग्लादेशी मुसलमान भी होते हैं जो पहचान में नहीं आते ।
इन सबका काम ये ये होता है कि मंदिर में कौन कौन सुन्दर सुंदर हिन्दू लड़कियाँ और महिलाएँ आती हैं ? उन सबपर दृष्टि रखते हैं । आंख मटक्का करके फँसा भी लेते हैं ।
आप हिंदुओं के स्वभाव को जानते ही हैं कि इनका मन्दिर में बैठे देवी देवताओं के आगे माथा टेककर तो वैसे ही पेट नहीं भरता और इनको माथा टेकने के लिए मज़ारें भी चाहियें तो ये निर्लज्ज हिन्दू महिलाएँ अपनी बेटियों को साथ लेकर मूँह उठाकर मजारों पर भी ऐसी तैसी कराने पहुँच जाती हैं
और वहाँ से कई बार तो मुल्ला जी कोई ऐसा पदार्थ प्रसाद में मिलाकर बेहोश कर देते हैं और वहीं पर सक्रिय अपने इस्लामी गुंडों की सहायता से महिला या लड़की को उठाकर कहीं और ले जाते हैं । ऐसे ही कई लड़कियाँ और महिलाएँ सैकड़ों की संख्या में गायब की जाती हैं और फिर सामूहिक बलात्कार करके मार दी जाती हैं ।


